बेसिक शिक्षा की परीक्षा में मिली बड़ी लापरवाही, 2022 के ही प्रश्नपत्रों के सिर्फ वर्ष बदलकर करा दी गई परीक्षा, बीएसए को डीएम ने लगाई लताड़





सादात। शासन की लाख कोशिश और कवायदों के बावजूद बेसिक शिक्षा की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही, क्योंकि खुद विभागीय अधिकारी ही विभाग को पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसका जीवंत उदाहरण है बेसिक विभाग द्वारा करायी जा रही 2023 की वार्षिक परीक्षा, जिसमें वर्ष 2022 का ही पेपर 2023 में भी आया है। बस फर्क इतना है कि इस बार क्रम संख्या बदल दिया गया है। कुछ पेपर में तो क्रम संख्या भी हूबहू दे दी गई है। बता दें कि परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की वार्षिक परीक्षा सोमवार 20 मार्च से शुरू हुई। जिले के 2269 स्कूलों में परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को मिले प्रश्न पत्र का जब अवलोकन किया गया तो पता चला कि जो पेपर वर्ष 2022 में आया था हुबहू वही पेपर इस बार भी आया है। केवल इतना हुआ है कि प्रश्नों का क्रमांक बदल दिया गया है। कमोबेश यही स्थिति कक्षा तीन से आठ तक के पेपरों में देखने को मिल रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि जनपद स्तर पर 15 मार्च को प्रश्नपत्र तैयार कराकर 18 मार्च को समस्त बीईओ के माध्यम से विद्यालयों पर वितरण का कार्य सुनिश्चित कराया जाय। विडम्बना तो यह है कि अब तक दो दिनों में गृहशिल्प, कृषि, खेल व स्वास्थ्य के साथ ही विज्ञान व संस्कृत विषय की परीक्षा हो चुकी है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य कैसा होगा, इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं इस तरह की घटना सामने आने के बाद जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने बीएसए को फटकार लगाई और स्कूलों पर नए पेपर भेजने का निर्देश दिया। जिसके बाद आनन फानन में विभाग ने नए पेपरों को स्कूलों पर भेजा।



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